बिहारी के दोहे – Bihari Ke Dohe

बिहारी के दोहे – Bihari Ke Dohe

Bihari Ke Dohe Anmol Gyanआनन्दमय जीवन की कला
बिहारी के दोहे हिंदी में : Bihari Ke Dohe in Hindi


बिहारी रीतिकाल के प्रमुख कवि माने जाते हैं, “बिहारी सतसई” उनकी एक मुख्य रचना है बिहारी की रचना मधुर और मनमोहक ( Sweet and charming ) हैं बिहारी के कुछ प्रसिद्ध दोहे निम्नलिखित है –

मेरी भववाधा हरौ, राधा नागरि सोय ।
जा तन की झाँई परे स्याम हरित दुति होय ।।
कोटि जतन कोऊ करै, परै न प्रकृतिहिं बीच ।
नल बल जल ऊँचो चढ़ै, तऊ नीच को नीच ।।।
नहिं पराग नहिं मधुर मधु नहिं विकास यहि काल ।
अली कली में ही बिन्ध्यो आगे कौन हवाल ।।
नीकी लागि अनाकनी, फीकी परी गोहारि ।
तज्यो मनो तारन बिरद, बारक बारनि तारि ।।
चिरजीवौ जोरी जुरै, क्यों न स्नेह गम्भीर ।
को घटि ये वृषभानुजा, वे हलधर के बीर ॥
कब को टेरत दीन ह्वै, होत न स्याम सहाय ।
तुम हूँ लागी जगत गुरु, जगनायक जग बाय ।।
सतसइया के दोहरा ज्यों नावक के तीर ।
देखन में छोटे लगैं घाव करैं गम्भीर ।।
या अनुरागी चित्त की, गति समुझै नहिं कोइ ।
ज्यों-ज्यों बूड़ै स्याम रंग, त्यों-त्यों उज्जलु होइ ॥
बतरस लालच लाल की, मुरली धरी लुकाय ।
सौंह करै, भौंहन हँसै, देन कहै नटि जाय ॥
कहति नटति रीझति खिझति, मिलति खिलति लजि जात ।
भरे भौन में होत है, नैनन ही सों बात ॥

– Anmol Gyan India –

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