पारिवारिक और व्यवहारिक जीवन में खुशियां – Happy Family And Practical Life

पारिवारिक और व्यवहारिक जीवन में खुशियां – Happy Family And Practical Life

Happy Family पारिवारिक जीवन में खुशियांThe Art of Happiness Life
पारिवारिक और व्यवहारिक जीवन में खुशियां : Paarivaarik Aur Vyavahaarik Jeevan Me Khushiyaan

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है । ( Human is a social creature ) वह आदिमानव कल से ही समूह बनाकर रहता आया है । समूह में रहना जीवों की प्रवृति है । ( Living in a group is the tendency of living being ) समूह बनाकर रहने का नियम वन्य जीवो पर भी लागू होता है प्राय:देखा गया है की शाकाहारी ( Vegetarian ) जंगली जीव जैसे – हाथी ( Elephant ) , जिराफ ( Giraffe ) व भैसे आदि हमेशा झुण्ड बनाकर ही रहते है क्योंकि जंगल ( Forest ) में अकेले रहने का मतलब है, मांसाहारी जीवों का आसान शिकार बनना । इसी प्रकार मांसाहारी जीव भी समूह में ही शिकार करते है क्योकि समूह बनाकर शिकार करने से शिकार में सफल होने की सम्भावना बढ़ जाती है ( Hunting by making groups increases the likelihood of success in hunting )। क्रम विकास में पीछे जाने पर हम देखगे की जब मनुष्य आदिमानव ( Primordial ) था । तब वह जंगलो और गुफाओ ( The cave ) में झुण्ड या टोलिया बनाकर निवास करता था ।

उस समय के आदिमानव अपना – अपना कार्य बाँट लेते थे । कोई शिकार मारकर लाता तो कोई उसे पकाता , अन्य कोई पानी की व्यवस्था करता आदि । उनके समूह में रहने की इसी प्रवृति का प्रभाव आज तक हमारे व्यव्हार ( Behavior ) व जीन्स में है । इसी कारण से हम पारिवारिक और व्यवहारिक ( Family friendly and practical ) है और होना भी चाहिए । परन्तु मनुष्य का व्यव्हार समय के साथ परिवर्तित होता जा रहा है ( Man’s behavior is changing over time ) । वह लोभ , लालच व ईर्ष्या ( Greed, greed and jealousy ) आदि से ग्रस्त होकर अपने पारिवारिक व्यव्हार तथा व्यवहारिकता को समाप्त कर रहा है । दूसरो के प्रति ईर्ष्या की भावना रखकर वह दूसरो के साथ – साथ खुद को भी नुकसान पहुचाता है ।

आज के जीवन में मनुष्य की परेशानी का कारण खुद की असफलता नही बल्कि दूसरो की असफलता ( Failure ) है । जरा सोच के देखिए, यदि ये दुनिया आप की हो हर सुविधा , वस्तु स्थान आपके आधीन है सब कुछ आप के आधीन हो परन्तु आप के अलावा की इन्सान इस धरती पर न हो तो क्या आप रहना चाहेगे, इस धरती पर मैं तो नही रहना चाहूँगा! शायद आप भी नहीं ! आखिर क्यों ? क्योंकि बिना हमारे परिवार के , बिना लोगो के ये धरती तो एक अकेले व्यक्ति के लिए नर्क हो जाएगी ( This earth will be hell for a single person ) क्योंकि मनुष्य की प्रकृति एकान्त रहने की है ही नही ( Because the nature of man is not to be solitary. ) । इस धरती पर अकेले रहना मानसिक प्रताड़ना ( Mental harassment ) ही होगी ।

यह सब जानने के बाद भी की जिन्दगी जीने के लिए मुझे दूसरे मनुष्यों की आवश्यकता है वह दूसरो के प्रति द्वेष की भावना रखता है ( He keeps the feeling of hatred towards others ) ईर्ष्या करता है । इस बात से भी अज्ञान बना रहता है की उसका खुद का व दूसरे व्यक्ति का भी समय निश्चित है दोनों ही एक दिन नही रहेंगे , न ही उनके द्वारा एक दूसरे के प्रति इर्ष्या पूर्ण बाते और ना ही ईर्ष्या पूर्ण किये गये कार्य दोनों के विचार , कार्य , व्यवहार , वचन ( Thought, work, behavior, promise ) सब का अस्तित्व समाप्त हो जायेगा । ( Everything will end ) वह व्यक्ति इर्ष्या से अपने व दूसरो के जीवन के अनमोल समय ( Precious time ) को भी नष्ट करता है ।

व्यक्ति को अपने परिवार व अन्य व्यक्तियो के साथ खुश रहकर , खेलकर , यादे साझा ( Happy, playing, sharing ) करके व्यतीत करना चाहिए । खुश रहने के लिए और ईर्ष्या की भावना को दूर करने के लिए अपना ज्यादा से ज्यादा समय अपना पसंदीदा कार्य करके ( Doing your favorite job ) , परिवार के बीच रहकर बिताना चाहिए ( Should spend living among the family ) । बच्चो के साथ खेलकर ( Playing with kids ) , दूसरे व्यक्ति से विचार साझा करके ( By sharing ideas with another person ), व्यतीत करना चाहिए । सब का समय निश्चित है ( All time is fixed )। परिवार का, दोस्तों का और आप का भी यह बीत जाने पर फिर से नहीं लौटने ( To return ) वाला ।

– Vivek Kumar, Delhi –

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