पकौड़ा रोजगार योजना पर कविता – Pakoda Rojgar Yojana Par Kavita

पकौड़ा रोजगार योजना पर कविता – Pakoda Rojgar Yojana Par Kavita

Pakora Remark in HindiThe Art of Happiness Life
पकौड़ा रोजगार योजना – Pakoda Rojgar Yojna
:: Pakora Remark in Hindi ::
आने पे विनाशकाल होती विपरीत बुद्धि
मूढ़ चित्त में कभी भी ज्ञान नहीं आता है।
कपटी कुचाली द्वेषधर्मियों का समुदाय
हर एक बात का बतंगड़ बनाता है।
तुच्छ स्वार्थ हेतु बेचते रहे हैं जो ज़मीर
उनको पकौड़ा बेचना न रास आता है।
:: बुरा न मानो राजनीति है ::
तेवर बदल रहे हैं सियासत की चाल के,
अब रोड पे जलपान भी करना संभाल के।
ठेला लगा रहे डिजाइनर दुकानदार,
दे दें कहीं न भाँग पकौड़े में डाल के।
:: गुस्ताख़ी माफ ::
हो बेग़ैरत खुदी गिरवीं
रखा ईमान करते हो,
मगर ईमानदारों को
कहा बेईमान करते हो।
पकौड़ा बेचने वालों का
क्यों अपमान करते हो ?

– © योगी देशबन्धु –

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