शिव मंत्र ज्ञान – Shiv Mantra Gyan

शिव मंत्र ज्ञान – Shiv Mantra Gyan

Shiv Mantra Gyanआनंदमय जीवन की कला
शिव मंत्र ज्ञान हिन्दी में
Shiv Mantra Gyan in Hindi

भगवान शिव ( Lord Shiva ) को देवो के देव महादेव कहा जाता है। लोक कल्याण ( Public welfare ) के लिये शिव जी ने विष ( Toxin ) को धारण किये थे । महादेव ( भगवान शिव ) की आराधना ( Worship ) बहुत फलदायी मानी गयी है। भगवान शिव की पूजा के लिये सोमवार का दिन अच्छा माना जाता है । ( Monday is considered good for worshiping Lord Shiva. )

भगवान शिव शंकर को प्रसन्न करने का मंत्र ( Mantra ) – ॐ नमः शिवाय॥

यह भगवान शिव का मूल मंत्र ( Basic mantra ) हैं। यह सबसे बड़ा, लोकप्रिय ( Popular ) और ऊर्जा ( Energy ) प्रदान करने वाला मंत्र है इस मंत्र से नकारात्मक विकार नष्ट हो जाते हैं ( This mantra destroys negative disorders ) और हमारे अनमोल जीवन को आनंदमय बना देता है। जिसे हिंदू धर्म में आस्था ( Faith ) रखने वाला हर शिव भक्त ( उपासक ) जाप करता है।

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इस मंत्र  का जाप, हर वर्ग ( बड़े, बूढ़े, जवान, बच्चे ) ( Older, old, young, children ) के लोगों को प्रत्येक दिन ( Every day ) कम से कम 5-10 मिनट अवश्य करना चाहिए !

  • महामृत्युंजय मंत्र – 
    ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
    उर्वारुकमिव बन्धनानत् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
  • रुद्र गायत्री मंत्र –
    ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि
    तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥

शिवपुराण कथा में, ओमकार (भगवान शिव) के 12 ज्योतिर्लिंग का वर्णन ( The description ) किया गया है।
इन सभी ज्योतिर्लिंग का दर्शन ( Visit ) भाग्यशाली लोग ( Lucky people ) ही कर पाते हैं लेकिन मंत्र जाप के माधयम से ( Through Mantra Jap ) इनके दर्शन माने जाते हैं ।
भगवन शिव के 12 ज्योतिर्लिंग –
मल्लिकार्जुनम्, सोमनाथम्, महाकालेश्वरम, वैद्यनाथम्, भीमशंकरम्, रामेश्वर, नागेश्वरम्, विश्वेश्वरम्, त्र्यंम्बकेश्वर , घृष्णेश्वरम्, ममलेश्वर व केदारनाथम्।

मंत्र –
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम्। उज्जयिन्यां महाकालमोङ्कारममलेश्वरम्॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमशङ्करम्। सेतुबन्धे तु रामेशं नागेशं दारुकावने॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यम्बकं गौतमीतटे। हिमालये तु केदारं घुश्मेशं च शिवालये॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः। सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति॥

एतेशां दर्शनादेव पातकं नैव तिष्ठति। कर्मक्षयो भवेत्तस्य यस्य तुष्टो महेश्वराः॥
द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्रम्।

प्रेम से बोलो – ॐ नमः शिवाय॥

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2 Comments

  1. सुधीर

    Very good post. Mantro ke jaap aur dhyan karne se man ko bahut shanti aur milti hai.

  2. Aap ne sahi bataya hai ki om ke jaap se positive thoughts mind me aate hai.. aur nagative thoughts nust ho jate hai.

    Thanks.
    AnmolGyan.com

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