दिवाली पर कविता – Diwali Par Kavita

दिवाली पर कविता – Diwali Par Kavita

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दिवाली पर कविता हिंदी में : Diwali Par Kavita in Hindi

Diwali Par Kavita -1

हो विजय आज भी यार दीपावली, दिल बने प्रेम-आगार दीपावली ।
रोज ही अब उगे एक सूरज नया, फैलता ही रहे प्यार दीपावली ।
खुश रहें लोग सब रौशनी हो यहाँ, शोभते हों गले हार दीपावली ।
आँधियों से बचें प्रेम की वादियाँ, सींचते ही रहो क्यार दीपावली ।
नेह ‘अंजान’ से तुम बनाकर रखो, है बहुत राह दरकार दीपावली ।

 Diwali Par Kavita – 2 : वर्तमान परिदृष्य और मेरी तीन कुंडलियां

दीवाली अर्पित करो उन वीरों के नाम ।
जिनका जीवन आ गया मात्रृभूमि के काम ।
मातृभूमि के काम प्राण का दीप जलाया ।
सैनिक होने का पुनीत कर्तव्य निभाया ।
बिखर गए सिन्दूर हो गए आंगन खाली ।
उजडे़ कितनी कोख हुयी तब शुभ दीवाली ।।

Kavita  – 3

दीवाली है द्वार पर हालत है बेहाल ।
करता हर पल श्रम अथक रहता है कंगाल ।
रहता है कंगाल देश का भाग्यविधाता ।
नेता नारा नीति उसे कुछ समझ न आता ।
देशबन्धु जब तक न रहे हर घर खुशहाली ।
जबतक दुखी किसान न होगी शुभ दीवाली ।।

Kavita  – 4

दीवाली पर हम नहीं सकें पटाखे दाग ।
घुसपैठी रखते रहें उपवन में नित आग ।
उपवन में नित आग रोहिंगया बांग्लादेशी ।
काश्मीरी पंडित घर में ही हुए विदेशी ।
छठ पूजा पर रोक मोहर्रम पर दे ताली ।
महामहिम यदि कहें मनावो तब दीवाली ।।

Diwali Par Kavita in Hindi

– © योगी देशबन्धु –

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